विशिष्ट गीतकार :: डॉ रंजीत पटेल
निर्भया को याद करते हुए उजाले समय में तमस डाला डेरे राह में चतुर्दीक कंटकों के घेरे छला है उसे सबने रौंदा मन के सपने बचकर कहाँ जायें हर जगह…
निर्भया को याद करते हुए उजाले समय में तमस डाला डेरे राह में चतुर्दीक कंटकों के घेरे छला है उसे सबने रौंदा मन के सपने बचकर कहाँ जायें हर जगह…
हर जगह हैं पत्थरबाज़ – अविनाश रंजन समकालीन कविता के प्रमुख हस्ताक्षर अरुण शीतांश का यह…
नज़्म – रेप शेख फ़रमाते हैं डार्विन झूठा था इंसान कब बंदर था? इंसान तो ऐसा कभी भी नहीं था शेख फ़रमाते हैं लटकना, झपटना,कभी मुँह चिढाना ये आदत हमारी…
वायरस जानते हो समय भूमंडलीकरण में जितने हम-सब पास-पास आयें थे उतने ही दूर होते जा रहे हैं इंसान अपने हाथों अपनी सभ्यता को नष्ट करने पे तुला है एक…
1 मैं भी हाँ मे हाँ मिलाना सीख ही लूँ जैसा गाना हो बजाना सीख ही लूँ। बॉस की हर बात पर, बेबात पर भी क़हक़हा खुलकर लगाना सीख…
लघुकथा …………………………. जन्म दिन – डॉ. महिमा श्रीवास्तव गत वर्ष मैं उदयपुर, मेरे पुत्र से…
कहानी ………………. इम्तहान – डॉ. अनिता सिंह कुमुद को लगा जैसे उसके दिमाग में धुँए का गुबार घुस रहा हो।धीरे-धीरे उसका पूरा शरीर धुंए…