विशिष्ट गीतकार : वीरेन्द्र आस्तिक
सर-सर बहा पवन अकस्मात इस मधुवन में सर-सर बहा पवन तभी देखने में आया इक नटखट मौसम झूम उठी हर टहनी जैसे झूम उठें झूमर कई जंगली चिड़ियां बैठी झूल…
सर-सर बहा पवन अकस्मात इस मधुवन में सर-सर बहा पवन तभी देखने में आया इक नटखट मौसम झूम उठी हर टहनी जैसे झूम उठें झूमर कई जंगली चिड़ियां बैठी झूल…
राजधानी एक्सप्रेस – मुकुन्द प्रकाश मिश्र मैं रेलवे स्टेशन पर बैठ कर ट्रेन का इंतजार कर रहा था ।किसी ने कहा ट्रेन हमेशा की तरह है 2 घंटे लेट !…
भावनाओं का प्रतिबिंब : कई-कई बार होता है प्रेम – डाॅ. भावना “कई -कई बार होता है प्रेम“ प्रगतिशील, प्रतिबद्ध एवं प्रयोगधर्मी यवा कवि अशोक सिंह का सद्य प्रकाशित काव्य-संग्रह…
चारदीवारी तुम्हारे अपने शहर में, अतिव्यस्त मार्केट की चकाचौंध, और लोगों की रेलमपेल के सहारे आगे बढ़ते, जहाँ सड़क और फुटपाथ के अंतर की सीमा रेखा, शायद अपना अस्तित्व बचाते…
घिर रही हैं बदलियां अब जाने किधर घिर रही हैं बदलियां अब जाने किधर ना जाने किस देस में ठनका गिरा है किस दिशा में मेघ ने खुद…
आधुनिक हिन्दी ग़ज़ल-शिल्प और कथ्य – Nअनिरुद्ध सिन्हा मैं यह मानता हूँ दुष्यंत कुमार हिन्दी ग़ज़ल के अनिवार्य हस्ताक्षर हैं। उनके ग़ज़ल -लेखन का कथ्य परिवेश जितना विशाल है,उतना ही…
रोचकता की खुशबू से पन्ने महक रहे : पारुल सिंह “यायावर हैं आवारा हैं बंजारे हैं”, ये किताब हाथ में लेते ही मुझे बहुत भा गई। सुंदर कवर, हल्का…
1मेरी छोटी-सी उलझन को सुलझाने में साथी मुझको लेकर आए मयख़ाने में शीशा तोड़ा फिर दिल तोड़ा पर जाने दो ऐसा उनसे हो जाता है अनजाने में मतलब की ये…
स्वाभिमान का जीना लीकें होती रहीं पुरानी सड़कों में तब्दील नियम-धरम का पालन कर हम भटके मीलों-मील । लगीं अर्जियाँ ख़ारिज लौटीं द्वार कौन-सा देखें उलटी गिनती फ़ाइल पढ़ती किसके…
लोग कविता में स्वाद देखते है उस खून को नहीं देखते जो स्याही बनकर टपकता है आँखों से कुछ लोगों को आदत है शब्दों को ईधर उधर करने की ये…