हास्य व्यंग्य
मूँछ, नाक और मनोबल – स्नेह मधुर हर इन्सान के चेहरे पर नाक होती है। शरीफ और पढ़े लिखे लोग इस नाक को अपनी इज्जत बताते हैं। वैसे जानवरों की…
मूँछ, नाक और मनोबल – स्नेह मधुर हर इन्सान के चेहरे पर नाक होती है। शरीफ और पढ़े लिखे लोग इस नाक को अपनी इज्जत बताते हैं। वैसे जानवरों की…
उर्दू हिंदी अल्फ़ाज़ का हसीन मिलन शब्दों की कीमत शायरी का लगाव हमेशा दिल से रहा है. मौज़ू और मंज़ूम कलाम को शायरी कहते हैं. दूसरे शब्दों में अपने हुस्न-ए-ख़्याल…
गोपी लौट आया – दर्शन सिंह आशट जब स्कूल से घर आकर गोपी ने अपना बैग फर्श पर फेंका तो उस में से कुछ फटी हुई कापियाँ और पुस्तकें बाहर…
लाल दुख.. दुःख तो हमेशा से ही सदाबहार रहा है पर उसमें खिलने वाले फूल …. वो फूल… जो किसी स्त्री की देह के लिए ही खिलते हैं निश्चित ही….…
डिलीट होते रिश्ते ‘समकालीन कथा परिदृश्य में मुखरित संवेदनहीन होते मानवीय रिश्ते’ – आज का यही मुद्दा था. व्हाट्सएप ग्रुप ’वाक् युद्ध’ के इस वैचारिक बहस में वह भी कूद…
किंबहुना – ए. असफल जीएम मीटिंग लेने वाले थे। आरती के हाथ पाँव फूल रहे थे। फाउन्डेशन की एक और प्रोजेक्ट आफीसर नीलिमा सिंह उसे नष्ट कराना चाहती है। जीएम…
………………………………………………. संप्रत्ति – मंदसौर, मध्यप्रदेश
विशिष्ट गजलकार : दरवेश भारती 1 हम ज़िन्दगी की राह खड़े देखते रहे झूठी खुशी की राह खड़े देखते रहे आयेगी और मिटायेगी जो तीरगी-ए-ज़ेह्न उस रौशनी की राह खड़े देखते रहे आपस की दुश्मनी का रहे अब न सिलसिला हम दोस्ती की राह खड़े देखते रहे सब- कुछ हड़प गया वो सुधारों की आड़ में जिस…