ट्वईंटी-ट्वईंटी के प्लाट पर प्रेम :: चित्तरंजन कुमार

ट्वईंटी-ट्वईंटी के प्लाट पर प्रेम – चित्तरंजन कुमार किस-किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम तू मुझसे खफा है तो जमाने के लिए आ -अहमद फराज बातें हुई तो प्रेम,…

संस्मरण :: बाघ की गुर्राहट सुन पेड़ पर कटी रात

बाघ की गुर्राहट सुन पेड़ पर कटी रात! – बिभेष त्रिवेदी, वरीय पत्रकार यह बनौली फारेस्ट गेस्टहाऊस है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बड़े परिसर में बेतिया राज का गेस्टहाऊस। यहां…

बलात्कार एक सामाजिक अपराध बनाम बीमार समय और समाज : संजीव जैन

बलात्कार एक सामाजिक अपराध बनाम बीमार समय और समाज    हम जिस समय और समाज में रह रहे हैं वह अपने सामूदायिक दायित्वों की पूर्ति की दृष्टि से बीमार है…

समकालीन कविता में रश्मिरेखा ने बनायी थी विशिष्ट पहचान :: चितरंजन

समकालीन कविता में रश्मिरेखा ने बनायी थी विशिष्ट पहचान :: चितरंजन एकांत में जीवन की तलाश जोखिम भरा कार्य है. यह तलाश तब और कठिन हो जाती है, जब हमारी…

रचनाकार स्मरणः ‘अंधेरे में रोशनी की सेंध’ की कवयित्री :: डॉ रमेश ऋतंभर

रचनाकार स्मरणः ‘अंधेरे में रोशनी की सेंध’ की कवयित्री “रश्मिरेखा का नाम समकालीन साहित्य के पाठकों के लिए अपरिचित नहीं है। उनकी टिप्पणियाँ और कविताएँ लगातार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती…

मनोरंजन : ध्वनि और छवियों का बाजार और मीडिया :: संजीव जैन

मनोरंजन : ध्वनि और छवियों का बाजार और मीडिया आज मनोरंजन एक उद्योग है जो हम तक ध्वनि और आभासी छवियों के बाजार के रूप में पहुंचता है। अब हम…

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / हिंदी ग़ज़ल का युवा चेहरा अमन :: अनिरुद्ध सिन्हा

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / हिंदी ग़ज़ल का युवा चेहरा अमन :: अनिरुद्ध सिन्हा रोक सकते हो तो रोको मजहबी तकरार को खून यूँ बहता रहा तो ये सदी मर…

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / अमनुआ और मैं :: राहुल शिवाय

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / अमनुआ और मैं :: राहुल शिवाय अमनुआ , यही कहता था मैं उसे, आखिर था भी मेरा लाडला.. अमन से मेरी पहली पहचान उसकी लघुकथाओं…

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी :: बहुत बहुत याद आओगे भाई -शुचि ‘भवि’

श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी :: बहुत बहुत याद आओगे भाई – शुचि ‘भवि’ आभासी दुनिया में अमन चाँदपुरी मुझसे भाई बनकर मार्च 2017 में डॉ हरि फ़ैज़ाबादी जी के फ़ोन से…