जनकवि दुष्यन्त : हिंदी ग़ज़ल में सामाजिक सरोकार और साहित्यिक योगदान : डॉ.पूनम सिन्हा श्रेयसी
जनकवि दुष्यन्त : हिंदी ग़ज़ल में सामाजिक सरोकार और साहित्यिक योगदान …
जनकवि दुष्यन्त : हिंदी ग़ज़ल में सामाजिक सरोकार और साहित्यिक योगदान …
हिन्दी का नाराज़ शायर दुष्यंत -डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी दुष्यंत नई कविता के…
कवि सत्यनारायण और हिन्दी नवगीत डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री सत्यनारायण हिन्दी के महत्वपूर्ण गीतकार हैं.बिहार का राज्य गीत इनके द्वारा रचा गया है- मेरे भारत के कंठ हार तुझको शत…
हिंदी ग़ज़ल में नदी, पोखर, झील, दरिया और समुन्दर डॉ. भावना जल ही जीवन है। जल के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। प्रकृति ने हमें झील,…
शिक्षा के बाद भी गरीब हाशिये पर आचार्य शीलक राम संसार में पहले भी और अब भी अनेक राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, पंथिक, मजहबी, सुधारवादी, वैज्ञानिक, भक्तिवादी,योगाभ्यास से संबंधित विचारधाराएं, सिद्धांत,वाद,पंथ,मत,…
श्रीरंग शाही ने बज्जिका और हिंदी साहित्य को दी समृद्धि डॉ इंदिरा कुमारी स्व० (डॉ०) श्रीरंग शाही जी का जन्म 7 फरवरी 1934 को मुजफ्फरपुर जिले के औराई अंचल अन्तर्गत…
डॉ. श्रीरंग शाही : एक गत्वर रचना पुरुष डाॅ महेन्द्र मधुकर, एमेरिटस प्रोफेसर यूजीसी भारतीय चिंतन में स्मरण को नवधा भक्ति के अंदर गिना गया है। स्मृति और स्मरण में…
डॉ. श्रीरंग शाही का आलोचना-कर्म अविनाश भारती 7 फरवरी सन् 1934 को मुजफ्फरपुर जिले के औराई अंचल अन्तर्गत शाही मीनापुर गाँव में जन्मे स्व० (डॉ०) श्रीरंग शाही जी भले ही…
बज्जिका के दैदीप्यमान रत्न श्रीरंग अमिताभ शाही कुछ लोग होते हैं जो अपनी यात्रा अटलता तथा वचनबद्धता के साथ शुरू करते हैं और अपने मानस में दीर्घकालीन दृढ़ता अक्षुण्ण रखते…
एक यायावर की स्मृति में डाॅ. राजेश कुमार सिंह, अतीत की सुनहरी समृतियों का मस्तिष्क में घूमड़ते रहना वैसे तो सामान्य,स्वाभाविक मनोप्रक्रिया है,किन्तु यदि हमारी दृष्टि अतीत के किसी अलिखित-अमिट…