ग़ज़ल की मुख़्तसर तारीख़ और हिंदी- उर्दू ग़ज़लों का इरतक़ाई (विकसित) पहलू 2020 तक :: अफरोज़ आलम

ग़ज़ल की मुख़्तसर तारीख़ और हिंदी- उर्दू ग़ज़लों का इरतक़ाई (विकसित) पहलू 2020 तक – अफरोज़ आलम उर्दू अदब के शोहरा आफ़ाक़ नक्क़ाद ( World fame critic) कलीमुद्दीन अहमद कलीम…

लोक आलोक की सांस्कृतिक सुरसरि डॉ मृदुला सिन्हा :: डॉ संजय पंकज

लोक आलोक की सांस्कृतिक सुरसरि डॉ मृदुला सिन्हा – डॉ संजय पंकज डॉ मृदुला सिन्हा हिंदी की बड़ी लेखिका थी और अपनी यश: काया के रूप में आज भी वे…

साक्षात्कार :: अवधेश प्रीत

देशज” पत्रिका समूह के  मंच पर वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार  *अवधेश प्रीत* जी से कुछ रोचक सवाल और उनके तथ्यपूर्ण जवाब : *प्रस्तुतकर्ता : अरुण शीतांश व कुमार विजय गुप्त*…

निबंध :: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में टैगोर

“आधुनिक परिप्रेक्ष्य में टैगोर” सत्यम शिवम सुंदरम गुरुवर रवीन्द्र नाथ टैगोर भारतीय सांस्कृतिक विरासत के शाश्र्वत प्रतिनिधि हैं और रहेंगे। विश्व कवि,चित्रकार, शिक्षाविद और सब से बढ़ कर मानवतावादी विचारक।…

आलेख : सलिल सरोज

प्रेम करने से पहले प्रेम को पढ़िए भी – सलिल सरोज “कौन सा गुनाह ? कैसा गुनाह ? किसी से जिंदगी भर स्नेह रखने, प्रेम करने का गुनाह… स्नेह और…

आलेख : मनोज जैन

मिल्टन से टकराता रहता रोज ईसुरी फाग के बहाने जंगबहादुर बंधु के दो गीतों पर मनोज जैन का समीक्षात्मक आलेख साहित्यिक विरादरी का शायद ही कोई शख्स ऐसा हो जिसका…

सुशांत, आखिर क्यों ,सुशांत ! – सलिल सरोज

सुशांत, आखिर क्यों ,सुशांत ! –  सलिल सरोज आत्महत्या निस्संदेह में एक जघन्य पाप है। एक आदमी जो खुद को मारता है, उसे इस दुनिया में बार-बार लौटना होगा और…