विशिष्ट गीतकार : मनोज जैन मधुर

परिचय : मनोज जैन मधुर, गीत व कविताओं की सांत संग्रह प्रकाशित. विभिन्न संस्थाओं की आेर से 15 से अधिक सम्मान. सम्पर्क – सी. एम.- 13, इन्दिरा कॉलोनी, बाग़ उमराव दूल्हा, भोपाल- 462010 (म. प्र. ) मोबाइल- 09301337806, 09685563682 ईमेल- manojjainmadhur25@gmail.com

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खास कलम : कल्पना पांडेय की छह कविताएं

………………………………………………. परिचय : मुख्य अध्यापिका, केंद्रीय विद्यालय, प्रगति विहार, लोधी रोड, दिल्ली मो.-  09899809960 ब्लॉग – mukharkalpana.blogspot.in

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दोहे – जयप्रकाश मिश्र

दोहे – जयप्रकाश मिश्र बच्चें भी पढ़ने लगे, तीर धनुष तलवार । दिल मेरा जलता रहा, देख हजारों बार।। उजड़ी बस्ती कह रही, जख्म भरा इतिहास। मत खेलो इंसान से, पशु करते परिहास।। नफरत बो कर चल दिया,एक अजब इंसान। गली गली खामोश है, सकते में है जान।। सम्बन्धों पर गिर रही, अब रोज रोज गाज। अगड़े पिछड़े दलित में, जब से बटा समाज ।। बिछिया पायल घूंघरू,खनक रहे है पाँव। मदभरे नयन सोचते, कैसे जीते दाँव ।। ऐसी भींगी देह भी, रह रह आती लाज। आँख हृदय से मांगती,…

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फ़िल्म समीक्षा

बंटवारे को लेकर एक अलग नजरिया देती है पार्टीशन 1947 अगर आप बंटवारे को लेकर जानना चाहते हैं, समझना चाहते हैं तो ‘पार्टीशन 1947’ आपको एक बार ज़रूर देखनी चाहिए। मुख्य कलाकार: हुमा कुरैशी, ह्यूज बोनविल, ओम पुरी, गिलिन एंडर्सन, मनीष दयाल, माइकल गैम्बोन, डेंजिल स्मिथ आदि। निर्देशक: गुरिंदर चड्ढा निर्माता: पॉल माएदा बर्ज़ेज़, गुरिंदर चड्ढा, दीपक नायर। भारत और पाकिस्तान का विभाजन मानव इतिहास की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक है। जहां पुरखों से रहते आये वो ज़मीं, वो संस्कार, वो गलियां वो घर बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों…

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हास्य व्यंग्य

मूँछ, नाक और मनोबल – स्नेह मधुर हर इन्सान के चेहरे पर नाक होती है। शरीफ और पढ़े लिखे लोग इस नाक को अपनी इज्जत बताते हैं। वैसे जानवरों की भी नाक होती है लेकिन जानवरों की नाक इनसानी नाक की तरह जब तब कटती नहीं रहती है। यह शोध का विषय हो सकता है कि इंसान को अपनी नाक कटने से अधिक पीड़ा होती है या जेब कटने से-  या फिर इंसान की जेब और नाक में किस तरह का संबंध है? इंसान की नाक उसकी प्रतिष्ठा का प्रतीक…

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रंगमंच

 नाटक – क्रमिक विकास, प्रयोग और प्रयोजन – वंदना शुक्ल – मार्क्स का अत्यंत प्रसिद्ध कथन है कि अभी तक दार्शनिकों ने दुनिया की व्याख्या की थी, लेकिन सवाल दुनिया को बदलने का है। बदलने का अर्थ तकनीकी विकास (विचारगत/विकास गत और आधुनिकीकरण के सन्दर्भ) से लिया जाये या सामाजिक क्रांति से? जहाँ तक सामाजिक (बदलाव) क्रांति का प्रश्न है इस दौर में या कहें परिवर्तन की प्रक्रिया के तहत अन्यान्य वैचारिक/प्रायोगिक पहलों के साथ साहित्य व कलाओं की सार्थक भागीदारी भी गौरतलब है, इसे नकारा नहीं जा सकता, क्यूँकि…

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पुस्तक-समीक्षा

उर्दू हिंदी अल्फ़ाज़ का हसीन मिलन शब्दों की कीमत शायरी का लगाव हमेशा दिल से रहा है. मौज़ू और मंज़ूम कलाम को शायरी कहते हैं. दूसरे शब्दों में अपने हुस्न-ए-ख़्याल को अल्फाज़ का हसीन जामा पहनाना ही शायरी है. शायर वो आइना है जो भूत, वर्तमान, भविष्य कके हालात की तस्वीर ज़माने को दिखाने की सलाहियत रखता है. बक़ौल अल्लामा जमील मज़हरी – न सेयाही के हैं दुश्मन न सुफ़ैदी के दोस्त हम को आइना दिखाना है दिखा देते हैं. किसी भी तखलीक़ पर अपनी राय देना भी कुछ इसी…

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बच्चों का कोना

गोपी लौट आया – दर्शन सिंह आशट जब स्कूल से घर आकर गोपी ने अपना बैग फर्श पर फेंका तो उस में से कुछ फटी हुई कापियाँ और पुस्तकें बाहर निकल कर बिखर गई। उसकी माताजी, जो पहले ही किसी कारण निराश-सी बैठी थीं, ने जब यह देखा तो उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने एकदम उसके गाल पर थप्पड़ जड़ दिया और बोली, ‘मॉडल स्कूल में पढते हो। वहाँ यही सब सिखाते हैं क्या? कितने दिन से देख रही हूँ। कभी बैग फेंक देते हो, कभी मोज़े और जूते निकालकर…

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आलेख

शरद कोकास के शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक मस्तिष्क की सत्ता की पांच कड़ियां हम पैदा ही नहीं  होते तो क्या होता ? ज़रा सोचकर देखिये अगर आप पैदा ही नहीं होते तो क्या होता ? कुछ नहीं होता , यह दुनिया जैसे चल रही है वैसे ही चलती , आपकी पत्नी का कोई और पति होता या आपके पति की कोई और पत्नी होती ,आपके बच्चों का बाप भी कोई और होता । हंसिये मत जब आप ही नहीं होते तो उनके लिए ‘ आपके शब्द कैसे प्रयोग कर सकते हैं…

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कल्पना पांडेय की चार कविताएं

लाल दुख.. दुःख तो हमेशा से ही सदाबहार रहा है पर उसमें खिलने वाले फूल  …. वो फूल… जो किसी स्त्री की देह के लिए ही खिलते हैं निश्चित ही…. सुर्ख़ लाल रंग के होते होंगे सटा के देखिये …कोई भी स्त्री से लाल रंग बेहद फबेगा … चाहे शरीर से रिसता हो या …सिंदूर सा चिपका हुआ ये लाल फूल वालाः दुःख ही है ….. जिसे धारण कर वो अपने होने का सुख बांचती फिरती है वो इम्तेहान देती रहती है उस पल ….. हर माह  …. हर उम्र…

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