मार्टिन जॉन की चार लघुकथाएं

डिलीट होते रिश्ते                   ‘समकालीन कथा परिदृश्य  में मुखरित संवेदनहीन होते मानवीय रिश्ते’ – आज का यही मुद्दा था. व्हाट्सएप ग्रुप ’वाक् युद्ध’ के इस  वैचारिक बहस में वह भी कूद पड़ा था. ग्रुप के सदस्यों के विचार पढ़ने और बड़ी शिद्दत से अपना पक्ष रखने में वह पूरी तरह तल्लीन था . उसी कमरे में पत्नी भी मौजूद थी. उसके भी हाथ में एंड्रोयाइड  मोबाइल था. वैसे वह नई फेसबुकिया थी. वह किसी दूर दराज़ की एक नई फ्रेंड से चैटिंग करने में मशगूल थी. शायद किसी नई रेसिपी बनाने…

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विशिष्ट कहानीकार : ए.असफल

किंबहुना – ए. असफल जीएम मीटिंग लेने वाले थे। आरती के हाथ पाँव फूल रहे थे। फाउन्डेशन की एक और प्रोजेक्ट आफीसर नीलिमा सिंह उसे नष्ट कराना चाहती है। जीएम से व्यक्तिगत सम्बंध हैं उसके। स्ट्रेंथ मुताबिक फाउन्डेशन में प्रोजेक्ट आफिसर की एक ही पोस्ट है। पहले वह जयपुर में थी तो सुखी थी। कोई प्रतियोगी न था। पर मुम्बई मैनेजमेन्ट ने उसका तबादला यहाँ रवान में कर दिया। एक साल में कड़ी मेहनत और संघर्ष से उसने काम जमा लिया तो कटनी फाउन्डेशन से अचानक नीलिमा भी यहीं आ…

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विशिष्ट गजलकार : दरवेश भारती

विशिष्ट गजलकार : दरवेश भारती 1 हम ज़िन्दगी की राह खड़े देखते रहे झूठी खुशी की राह खड़े देखते रहे आयेगी और मिटायेगी जो तीरगी-ए-ज़ेह्न उस रौशनी की राह खड़े देखते रहे आपस की दुश्मनी का रहे अब न सिलसिला हम दोस्ती की राह खड़े देखते रहे सब- कुछ हड़प गया वो सुधारों की आड़ में जिस ‘चौधरी’ की राह खड़े देखते रहे जो प्यार और वफ़ा के ही जज़्बे में गुम रहा उस आदमी की राह खड़े देखते रहे देकर दग़ा उन्हें भी मुख़ालिफ़ बना लिया जो आप ही की राह खड़े देखते रहे ‘दरवेश’ इस उमीद में बख्शेगा वो सुकूं मुख्लिस नबी की राह खड़े देखते रहे 2 आदमी ज़िन्दा रहे किस आस पर छा रहा हो जब तमस विश्वास पर भर न पाये गर्मजोशी से ख़याल इस क़दर पाला पड़ा एहसास पर वेदनाएँ   दस्तकें  देने लगें इतना मत इतराइये…

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विशिष्ट कवि : ब्रज श्रीवास्तव

___________________________ पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर कविताएं, समीक्षाएं व अनुवाद प्रकाशित. अब तक तीन काव्य संग्रह. पता : 233, हरिपुरा विदिशा, मो. 9425034312 email – brajshrivastava7@gmail.com

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