विशिष्ट कवयित्री : उमा झुनझुनवाला

एक मौन प्रार्थना बड़ी अदभुत है मौन की भाषा भी कहने वाले ने अपनी बात कह भी दी… और मान लिया कुछ बिन्दुओं को उकेर कर कहा है जो भी उसने वही बात पहुंची होगी प्रिय तक और मौन में अर्थ खोजता प्रेमी भी हो जाता है तृप्त ये सोचकर कि प्रिय ने ज़रूर कही होगी वही बात जो मचल रहे थे उसके अंतस में बिन्दुएँ चमकी और कल्पनाओं ने अपना काम किया पर भावनाएँ कोरी कल्पना नहीं होती ये संवादों की ज़मीन पर पनपती हैं… बढ़ती हैं… अठखेलियाँ करती…

Read More