खास कलम : अंजना झा

मेरे घर का कचरा आज बहुत ज्यादा परेशान थी मैं क्योंकि नहीं उठेगा आज मेरे घर का कचरा वाकई हैरान थी मैं।। कल ही तो आए थे गोधूलि बेला में…

ख़ास कलम : बृजमोहन स्वामी ‘बैरागी’

मेरे हिस्से की भूख : लाचार कविता —————————————————– ( गरीबी और लाचारी में जीवन यापन करते हुए एक कवि/लेखक की अंतरात्मा से लिखी गई एक कविता जो विश्व की महान…

खास कलम : विकास

1 सफर में रहनुमाई चाहता हूँ कहाँ तुमसे जुदाई चाहता हूँ मैं ज़िम्मेदार  हूँ  अपने किये का न  उसकी मैं बधाई चाहता हूँ ये कैसी ज़िद  मेरे  हिस्से में आई…

खास कलम : लकी निमेष

1 अगर जो गाँव को छोडूँ तो बस्ती रूठ जाती है अगर मैं शहर ना जाऊँ तरक्की रूठ जाती है मुहब्बत में शिकायत का अलग अपना मज़ा देखा मुझे जब…

खास कलम : विनय

हँसी का सौंदर्य झरने की तरह कल–कल करती ध्वनि आसमान में चिड़ियों का कलरव फूलों पर मंडराते भौंरों का गुंजन या फिर अल्हड़ हवाओं की सनसनाहट सच कहूँ ऐसे ही…