लघुकथा : सुरेखा कादियान ‘सृजना’
राधिका ”राधिका इतने साल से तुम्हें बुलाने की कोशिश कर रही हूँ, पर तुम हो कि मानती ही नहीं | ऐसी भी क्या जिद कि अपने दोस्तों की भी नहीं…
राधिका ”राधिका इतने साल से तुम्हें बुलाने की कोशिश कर रही हूँ, पर तुम हो कि मानती ही नहीं | ऐसी भी क्या जिद कि अपने दोस्तों की भी नहीं…
डिलीट होते रिश्ते ‘समकालीन कथा परिदृश्य में मुखरित संवेदनहीन होते मानवीय रिश्ते’ – आज का यही मुद्दा था. व्हाट्सएप ग्रुप ’वाक् युद्ध’ के इस वैचारिक बहस में वह भी कूद…
परिचय : आगमन व प्रतिलिपि कहानी प्रतियोगिता में तीसरा व आठवां स्स्थान. देश की विभिन्न पत्रिकाओं में कहानियां व लघुकथाएं प्रकाशित. दो तीन संयुक्त कहानी संग्रह में भागीदारी. पता : …