श्रद्धांजलि :: अमन चांदपुरी / अमन के नाम ग़ज़ल :: के.पी.अनमोल

कैसा ग़ज़ब है उसने किया राम राम राम
आते ही कह दिया है ‘विदा’ राम राम राम

अच्छा नहीं हुआ है मगर हो गया है बस
जो हो गया बुरा ही हुआ राम राम राम

किरदार बस जवान हुआ था अभी-अभी
परदा अभी है कैसे गिरा राम राम राम

राही ज़रा-सी देर रुका और चल दिया
सब देते रह गये हैं सदा राम राम राम

भीतर की आह करती रही हाय हाय हाय
बाहर से दर्द कहता रहा राम राम राम

उम्मीद की बस एक किरण खोजते हुए
ग़म ही हमारे पास बचा राम राम राम

‘अनमोल’ एक नन्हीं-सी ख़्वाहिश की जान पर
दुख का पहाड़ टूट पड़ा राम राम राम
– के. पी. अनमोल