विशिष्ट कहानीकार :: डॉ विकास कुमार
अप्रत्यक्ष शिकार – डा0 विकास कुमार लौतन वाली की इस बेरुखी से खिसियाकर कर घपोचन साह रेलवे पटरी की ओर बढ़ गया था,…
अप्रत्यक्ष शिकार – डा0 विकास कुमार लौतन वाली की इस बेरुखी से खिसियाकर कर घपोचन साह रेलवे पटरी की ओर बढ़ गया था,…
सपना मंजुल भावका – नंद कुमार आदित्य सिलसिला आपकी तगाफुलका दर्द पिंजरेमें बन्द बुलबुलका बागवाँ लाख …
अगले जनम फिर आना : सिद्धिनाथ स्मृति – सतीश नूतन 1982 में गाँव की गझिन गाछ, बरैला ताल पर उड़ते प्रवासी पक्षियों के कलरव, झाल-करताल-हरिकीर्तन के स्वर और दादी के…
शॉपिंग मॉल – डॉ.जियाउर रहमान जाफरी चलो ना मम्मी शॉपिंग मॉल ले आएंगे इक फुटबॉल वहां पे मिलती चीजें सारी अच्छी अच्छी प्यारी -प्यारी कपड़े रंग-बिरंगे …
लघुकथाओं को अलग ढंग से परिभाषित करते हैं रमेश बत्तरा …
अश्विनी कुमार आलोक की दो लघुकथाएं मूर्त्तियाँ मैं स्वयं नहीं समझ पा रहा था कि मैं किस मिट्टी का बना हुआ हूँ।मैंने इससे पहले भी अपने आप को न…
1 आँखों की तस्वीर अलग है आँसू की तस्वीर अलग अपना-अपना हिस्सा सबका है सबकी तक़दीर अलग प्यार किया हो जिसने केवल स्वाद वही जाने इसका होठों की तासीर अलग…
‘ग़ज़ल एकादश’ की ग़ज़लें आम आदमी के करीब …
हिंदी ग़ज़ल का नया लिबास – डॉ.जियाउर रहमान जाफरी हिंदी कविता की विविध विधाओं में ग़ज़ल सबसे…
समय की आवाज़ का प्रतिबिंब ‘अभी दीवार गिरने दो’ …