विशिष्ट गीतकार :: मधुकर अष्ठाना
अर्थ उलट जाते हैं कुछ बातें सीधी होती हैं लेकिन अर्थ उलट जाते हैं काने को काना कह देना आग लगा देता है अक्सर गहन अमाँ से भी हो जाती…
अर्थ उलट जाते हैं कुछ बातें सीधी होती हैं लेकिन अर्थ उलट जाते हैं काने को काना कह देना आग लगा देता है अक्सर गहन अमाँ से भी हो जाती…
1 कब तलक मुर्दा बने सोते रहोगे ज़िंदगी की लाश को ढोते रहोगे हाथ पर धर हाथ यदि बैठे रहे तो वक़्त को यूँ ही सदा, खोते रहोगे दीन दुनिया …
शारदे वर देना – मधुकर वनमाली बुद्धि नहीं कोई हर पाए बस यही शारदे वर देना अज्ञान मिटाओ तिमिरों के माँ सरस्वती दुख हर लेना।…
वक़्त के नब्ज को पकडती हुई कविताओं का संग्रह ‘बोलो न दरवेश’ स्मिता सिन्हा हमारे समय की गंभीर कवियत्री हैं। वे सामान्य जीवन में हँसती -खिलखिलाती मोरनी- सी जान पड़ती…
डॉ वशिष्ठ अनूप की कविताएं संघर्ष-प्रतिरोध की आवाज : ओम धीरज कविता अपने आरम्भिक काल से ही श्रुति के पंखों पर सवार होकर यात्रा करती रही है । छन्द मुक्त…
जिंदगी की खूबसूरती को अभिव्यक्त करने वाले ग़ज़लकार हस्तीमल हस्ती – भागीनाथ वाकले आदरणीय हरेराम समीप जी द्वारा सद्य संपादित ‘हस्तीमल हस्ती: चुनिंदा अशआर’ समन्वय प्रकाशन गाज़ियाबाद से प्रकाशित यह…
लोक,समाज और विचारधारा की त्रिवेणी थे बेनीपुरी …
रामवृक्ष बेनीपुरी की जीवन दास्तान – मंहथ राजीव रंजन दास छात्र जीवन मे ही महात्मा…
आत्मकथा और आत्मछलना के विभिन्न रूप : राजेन्द्र यादव – बातचीत : रूप सिंह चंदेल दलित और नारी विमर्श आज साहित्य और वैचारिक विमर्श की मुख्यधारा बन गया है…