विशिष्ट कवि :: श्यामल श्रीवास्तव

वायरस जानते हो समय भूमंडलीकरण में जितने हम-सब पास-पास आयें थे उतने ही दूर होते जा रहे हैं इंसान अपने हाथों अपनी सभ्यता को नष्ट करने पे तुला है एक…

विशिष्ट ग़ज़लकार :: दिनेश मालवीय अश्क

1 मैं  भी हाँ  मे  हाँ   मिलाना सीख ही लूँ जैसा  गाना  हो  बजाना  सीख   ही लूँ।   बॉस  की  हर  बात  पर, बेबात पर भी क़हक़हा  खुलकर लगाना सीख…

स्त्री और प्रकृति के अंतर्संबंधों के गीत : सत्यम भारती

पुस्तक समीक्षा ………………………………………………….. स्त्री और प्रकृति के अंतर्संबंधों के गीत सत्यम भारती प्रकृति और स्त्री में  बहुत हद तक एकरूपता है, दोनों का उद्देश्य  परोपकार,  समर्पण, दया और सद्भाव रहा…