अश्विनी कुमार आलोक की दो लघुकथाएं

अश्विनी कुमार आलोक की दो लघुकथाएं   मूर्त्तियाँ मैं स्वयं नहीं समझ पा रहा था कि मैं किस मिट्टी का बना हुआ हूँ।मैंने इससे पहले भी अपने आप को न…

विशिष्ट ग़ज़लकार :: रमेश चन्द्र गोयल ‘प्रसून’

1 आँखों की तस्वीर अलग है आँसू की तस्वीर अलग अपना-अपना हिस्सा सबका है सबकी तक़दीर अलग प्यार किया हो जिसने केवल स्वाद वही जाने इसका होठों की तासीर अलग…