विद्यापति के गीतों की काव्यगत विशेषताएँ :: डॉ. शान्ति कुमारी
विद्यापति के गीतों की काव्यगत विशेषताएँ – डॉ. शान्ति कुमारी विद्यापति हिंदी के…
विद्यापति के गीतों की काव्यगत विशेषताएँ – डॉ. शान्ति कुमारी विद्यापति हिंदी के…
हिन्दी ग़ज़ल उर्मिलेश से हटकर –डा जियाउर रहमान जाफरी हिन्दी में जब ग़ज़ल लेखन…
समकालीन हिन्दी ग़ज़ल में गांव की उपस्थिति -डा जियाउर रहमान जाफरी गजल उर्दू काव्य…
अनेक मान्यताओं का साक्षी मंदार बिखेर रहा है सांस्कृतिक गरिमा – कुमार कृष्णन अनेक पौराणिक किंवदंतियों से जूझता मंदार पर्वत शांत, अविचल खड़ा है। काले पहाड़ पर उकेरी हुई कलाकृतियाँ…
अविभाजित भारत का पहला कृषि अनुसंधानशाला पूसा (बिहार) और पूसा (दिल्ली) – वीरेन नंदा बिहार के मुजफ्फरपुर से तीस किलोमीटर दूर पूसा में कभी किलानुमा हवेली हुआ करती थी…
व्यंग्य आलेख रेलवे किसी की निजी संपत्ति नहीं – आशुतोष कुमार रेलवे के निजीकरण की बात सुन…
अभी ख़ून से शेर लिखने हैं हमको— डॉ. उर्मिलेश वशिष्ठ अनूप परिंदों में कोई फ़िरकापरस्ती क्यों नहीं होती, कभी मंदिर पे जा बैठे, कभी मस्ज़िद पे जा बैठे। तीर…
क्या सच्चिदानंद सिन्हा का नाम आपने सुना है …
तोतली जुबान वाला हर्ष डॉ शिवम् तिवारी “तातू, तातू, आ गए मेरे तातू” सर पर बेतरतीब बिखरे बाल, बदन पर पुरानी टी-शर्ट एवं अधफटी नेकर पहने महज 5 बरस का…
( डाॅ श्रीरंग शाही की पुण्यतिथि 25 सितंबर पर विशेष – उनके द्वारा लिखित आलेख संत कवि दादू) संत कवि दादू डाॅ श्रीरंग शाही दादू दयाल सर्वात्मवाद के प्रवर्तक और…