विशिष्ट ग़ज़लकार :: ओम प्रकाश यती
ओम प्रकाश यती की पांच ग़ज़लें 1 जब आएगा कभी ये वक़्त आपदा बनकर रहेंगे दोस्त मेरे साथ हौसला बनकर किसी की पूजा से वह क्यों बचे सियासत में न…
ओम प्रकाश यती की पांच ग़ज़लें 1 जब आएगा कभी ये वक़्त आपदा बनकर रहेंगे दोस्त मेरे साथ हौसला बनकर किसी की पूजा से वह क्यों बचे सियासत में न…
प्रेम किरण की दस ग़ज़लें 1 नफ़रत ही रह गयी है मुहब्बत चली गयी घर से हमारे रूठ के बरकत चली गयी हम भी ख़ुशी के नाज़ उठाते कहां तलक…
सुशील साहिल की पांच ग़ज़लें 1 चराग़े-ज़ीस्त का साया सफ़र में निकला है मेरे वजूद का आधा सफ़र में निकला है नज़र से खींच के तूफ़ाँ की सारी तस्वीरें…
दिनेश तपन की ग़ज़लें 1 धन दौलत संजोते रह गए पाप उमर भर ढोते रह गए थी ख़ुशियों की जिन्हें तमन्ना वे ही सब दिन रोते रह गए …
रमेश कँवल की छह ग़ज़लें 1 बदला बदला सा है मेरा दफ़्तर रूप सज्जा में है नया दफ़्तर बायोमेट्रिक से लोग आते हैं सीसीटीवी लगा हुआ दफ़्तर लैपटॉपों…
मधुवेश जी की 230 शेरों की लंबी ग़ज़ल का कुछ अंश ग़ज़ल : बहुत पहले न मोटर थी न बाइक थी न रिक्शा था बहुत पहले सफ़र पैदल किया…
1 हो न जाएं ख़ाक ये सद्भावना की बस्तियांँ मज़हबों की माचिसों में नफरतों की तीलिया कुछ हवा कुछ रोशनी कुछ खुशबुएं मिलती रहें, बस खुली रखनाहमेशा सोचकी सब…
डॉ विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ की चार ग़ज़लें 1 मुझे इश्क़ का तो पता नहीं , तेरे दिल का मुझको ख़याल है , जो मैं तुझ से मिल के न…
समीर परिमल की छह ग़ज़लें 1 आगे बढ़कर जी लूँ जिसको लम्हा ढूँढ रहा हूँ मैं काले सायों में इक साया अपना ढूँढ रहा हूँ मैं तेरे मेरे बीच में…
देवेंद्र मांझी की पांच ग़ज़लें 1 तमाम रात तड़प कर निकाल दी मैंने क़ज़ा भी आई जो सर पे वो टाल दी मैंने ज़माना मेरे तअक़्क़ुब में क्यों है…