मूल्यहीन होते समय में पितापरक कविताओं का अमूल्य संकलन :: डॉ पंकज कर्ण
मूल्यहीन होते समय में पितापरक कविताओं का अमूल्य संकल डॉ पंकज कर्ण महान चिंतक बर्ट्रेंड रसेल ने कहा है:- “आनंद कोई दुर्लभ चीज नहीं है। कई बार पके हुए फल…
मूल्यहीन होते समय में पितापरक कविताओं का अमूल्य संकल डॉ पंकज कर्ण महान चिंतक बर्ट्रेंड रसेल ने कहा है:- “आनंद कोई दुर्लभ चीज नहीं है। कई बार पके हुए फल…
समाज व साहित्य को नवीन दिशा में ले जाती गुलाबी गलियाँ -विनोद शर्मा ’सागर’ आजादी की पौन सदी व्यतीत हो चुकी है। हम आजादी का अमृत महोत्सव बड़े गर्व से…
उम्र भर हम सफर में भटकते रहे… अभी मौजूदा शायरी (मैं उर्दू और हिंदी गजलों के विवाद में पड़ना नहीं चाहता) के दौर में मुशायरों में धीरे-धीरे संजीदगी से अपनी…
स्त्री प्रेम की मार्मिक कथा कुलक्षिणी डॉ.भावना कुलक्षिणी उपन्यास हरिश्चंद्र दास का महत्वपूर्ण उपन्यास है, जो आर पब्लिकेशन मुंबई से छप कर आया है। इस पुस्तक को महाराष्ट्र साहित्य अकादमी…
अपने समय को समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज है जब थम गई दुनिया डॉ.भावना ‘जब थम गई दुनिया’ सुजीत वर्मा का सद्य: प्रकाशित उपन्यास है, जो सर्व भाषा प्रकाशन, नई दिल्ली…
हाज़िर और ज़ाहिर गज़लें : मधु सक्सेना इस दुनिया में सबकी अपनी अपनी नज़र होती है और अपना अपना नज़रिया ..कोई देख के चुपचाप आगे बढ़ जाता है ,कोई कुछ…
छंदबद्ध रचनाओं का दस्तावेज आये हैं तो काटेंगे …
‘तस्वीर कहीं तो है’ में रिश्तों का आपसी सामंजस्य डॉ भावना समकालीन हिंदी ग़ज़ल दुष्यंत के बाद आज जिस मुकाम पर है ,वहां…
‘रूदादे-सफ़र’ में देहदान जैसे जटिल विषय का बखूबी चित्रण : सुधा ओम ढींगरा पंकज सुबीर एक ग़ज़लकार, संपादक, कथाकार और उपन्यासकार हैं। कई कहानियों के साथ-साथ पहले तीन उपन्यास ‘ये…
आशा पाण्डेय जी की नज़र से समसामयिक जीवन का कोई भी सिरा छूट नहीं पाता – डाॅ भावना ग़ज़ल हिन्दी साहित्य की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा है। कोई विधा के…