लघुकथायें :: मधुकर वनमाली

मधुकर वनमाली की दो लघुकथायें  जोतिया-ढोरिया उस का नाम जोतिया था, और बेटी का ढोरिया। सब्जी की टोकरी लिए भोर में ही टोले में आ जाती। मां के चूल्हे के…

लघुकथाएं :: सुरेखा कादियान ‘सृजना’

सुरेखा कादियान ‘सृजना’ की दो लघुकथाएं सृजना “राज आँटी एक चाय ले के आना” वैष्णवी ने स्टाफ रूम में आते ही चाय के लिए बोला और थकी सी सर पकड़कर…

सुरेश सौरभ की दो लघुकथाएं

 ईश्वर के लिए उसे समझा-समझा, पक चुके थे, पर वह न मानता, कहता-बच्चे  ईश्वर की देन हैं। नौंवीं संतान को जन्म देते वक्त जब उसकी बीवी चल बसी, तब अपनी…

लघुकथा :: सुरेश सौरभ

सुरेश सौरभ की दो लघुकथाएं सहारे  घर की  तंगहाली से परेशान हो, उसे दूर करने हेतु, वह भगवान के सहारे होकर , एक दूर के पहुंचे, भगवान के पास पहुंची।…

प्रगतिशीलता का दंश :: दिनेश ‘तपन’

प्रगतिशीलता का दंश               –  दिनेश ‘तपन’ वे उच्च शिक्षा प्राप्त एक सम्पन्न व्यक्ति थे,मगर उन्हें गाँव का वातावरण प्रियकर नहीं लगा,लिहाजा पचास-साठ बीघे…

लघुकथा :: डॉ. सुमन मेहरोत्रा

हमारा राष्ट्रीय ध्वज               – डॉ सुमन मेहरोत्रा कल स्कूल में झंडा फहराया जायेगा. सभी बच्चों को एक झंडा और फूल लेकर जाना था.…

एक तीर दो निशान :: ज्वाला सांध्यपुष्प

एक तीर दो निशान ज्वाला सांध्यपुष्प शाम का वक़्त था। प्रभारी सब-इंस्पेक्टर आर के यादव अपने साथी सब-इंस्पेक्टर सुदीप पांडेय के साथ  थाने के पिछवाड़े के एक प्राइवेट कमरे में…

अश्विनी कुमार आलोक की दो लघुकथाएं

अश्विनी कुमार आलोक की दो लघुकथाएं   मूर्त्तियाँ मैं स्वयं नहीं समझ पा रहा था कि मैं किस मिट्टी का बना हुआ हूँ।मैंने इससे पहले भी अपने आप को न…