बड़ा पाप : चाँदनी समर

बड़ा पाप –     चांदनी समर संध्या के समय जब समुद्र की लहरें किनारे से टकरा कर दम तोड़ रही थी तो गुब्बारेवाला भी तेज़ी से गुब्बारे फुला कर अपनी सांसें…

लघुकथा :: जयप्रकाश मिश्र

मरछिया जयप्रकाश मिश्र अनाथ मरछिया कुत्ते के जूठे पत्तल चाट-चाटकर युवती हो गयी थी । आदर्श की रेशमी चादर ओढ़कर सिद्धान्त बघारने वाले उसकी प्रतीक्षा में पलक पाबड़े बिछाये बैठे…

लघुकथा :: संतोष दीक्षित

 अंकुश          – संतोष दीक्षित  साहेब सरकारी संत थे। एक सरकारी मठ के प्रधान थे।उन्हें खाने के बाद फल खाने की आदत थी। एक दोपहर पेट भर…

लघुकथा :: नज़्म सुभाष

खबरी अम्मा             – नज़्म सुभाष  अहले सुबह उठकर सारी नित्यक्रिया निपटाकर अंततः अम्मा छः बजे तक एकदम फ्री हो जाती फिर शुरू होती उनकी घरवादारी….…

लघुकथाएं : स्मिता श्री

मोद का तिलस्म धरती गांव की बहुत खुश है। और हर्षित हैं, सारे खेत – खलिहान। समझ नहीं आया तो बूढ़े बरगद ने धरती से पूछा, “आखिर किस सौभाग्य पर…

लघुकथा :: संगीता चौरसिया

तपस्या संगीता चौरसिया, खगड़िया रविन्द्र पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर पर था। उससे छोटी दो बहनें थीं जिसमें से एक की शादी उससे पहले हो गई थी। उपर के…

लघुकथा :: अमिताभ कुमार अकेला

 अमिताभ कुमार अकेला की दो लघुकथाएं रावण कौन आज विजयदशमी है। लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ रावण का पुतला दहन देखने हेतु गाँधी मैदान में जमा हुयी। मैदान…

लघुकथा :: एस.मनोज

विरासत घनानंद बाबू जीवन की नैतिकता और मर्यादाओं का पालन करते हुए आदर्श जीवन जीते रहे और उन्होंने अपने दोनों बेटों रूपक और दीपक को उच्च कोटि की शिक्षा दिलवाया।…