विशिष्ट गीतकार :: गरिमा सक्सेना

गरिमा सक्सेना के पांच गीत (1) दुहरापन जीते हैं झेल रही है नयी सदी यह मन-मन की संवादहीनता मन पर हावी हैं इच्छाएँ अस्त-व्यस्त ये दिनचर्याएँ छीन रही है सुख…

विशिष्ट गीतकार :: राहुल शिवाय

राहुल शिवाय के पांच गीत कौन करे पतितों को पावन बापू! कैसी थी बतलाओ आजादी की शाम आज अलग है क्या उस दिन से भारत का परिणाम सत्याग्रह ने अर्थ…

विशिष्ट गीतकार :: दिनेश प्रभात

दिनेश प्रभात के चार गीत शर्माने में सूद आँगन जैसे युवा हो गया, देहरी हुई जवान फागुन  में  गूँगी  दीवारें,  देने  लगीं  बयान   मौसम ने कुछ गीत रचे हैं…

विशिष्ट गीतकार :: रमेश शर्मा

अब देह का है कहाँ नेह प्रिये ! निस्तेज हुए अब नैन तेरे, वेणी में झलकते, केश धवल ! मुस्कान की झीलें, सूख गई, कुम्हलाने लगे, अधरों के कंवल !…

विशिष्ट गीतकार :: डॉ संजय पंकज

डॉ संजय पंकज के चार गीत गीत अधूरे तुम क्या जानो तुम्हें पता क्या तुम बिन कितने गीत अधूरे! वर्तमान के जस के तस ही अपने रहे अतीत अधूरे! खाली…

विशिष्ट गीतकार :: गरिमा सक्सेना

गरिमा सक्सेना के नारी विमर्श के पांच गीत 1 रिश्ता जीवन का पुनीत आधी आबादी ममता, त्याग, दुलार, मीत आधी आबादी   तुलसी, आँगन, घर की शोभा, बरतन-बासन पहली शिक्षा…

विशिष्ट गीतकार :: कुँअर उदय सिंह अनुज

फसलों-सा कट जाओ जैसे मुस्कातीं हैं सुबहें, वैसे तुम मुस्काओ। बहो हवा-सा रिश्तों में तुम, पेड़ों जैसा झूमों। पत्थर भी हों राहों में तो, लहरें बनकर चूमों। समय परोसे गर…

विशिष्ट गीतकार :: अनामिका सिंह

अनामिका सिंह के दस गीत शाम सबेरे शगुन मनाती  शाम सबेरे शगुन मनाती खुशियों की परछाई अम्मा की सुधि आई । बड़े सिदौसे उठी बुहारे कचरा कोने – कोने पलक…