Month: September 2017

विशिष्ट गजलकार : दरवेश भारती

विशिष्ट गजलकार : दरवेश भारती 1 हम ज़िन्दगी की राह खड़े देखते रहे झूठी खुशी की राह खड़े देखते रहे आयेगी और मिटायेगी जो तीरगी-ए-ज़ेह्न उस रौशनी की राह खड़े देखते रहे आपस की दुश्मनी का रहे अब न सिलसिला हम दोस्ती की राह खड़े देखते रहे…

रंगमंच

 नाटक – क्रमिक विकास, प्रयोग और प्रयोजन – वंदना शुक्ल – मार्क्स का अत्यंत प्रसिद्ध कथन है कि अभी तक…