डॉ श्रीरंग शाही एक अद्भुत व्यक्तित्व :: जयप्रकाश मिश्र
डॉ श्रीरंग शाही एक अद्भुत व्यक्तित्व जयप्रकाश मिश्र डॉ. श्रीरंग शाही एक ऐसे साहित्य मनीषी थे जिन्होंने पत्र के माध्यम से सैकड़ों पाठकों को लेखक बना दिया। वे एक निर्भीक…
डॉ श्रीरंग शाही एक अद्भुत व्यक्तित्व जयप्रकाश मिश्र डॉ. श्रीरंग शाही एक ऐसे साहित्य मनीषी थे जिन्होंने पत्र के माध्यम से सैकड़ों पाठकों को लेखक बना दिया। वे एक निर्भीक…
डॉ श्रीरंग शाही : मेरी दृष्टि में रामचन्द्र विद्रोही श्री शाही से मेरा सर्वप्रथम परिचय वर्ष 1983 में समाहरणालय, मुजफ्फरपुर के प्रांगण में हुआ था। वे मेरे अनन्य मित्र सहयोगी…
स्मृति के वातायन से प्रेरणा की लौ बुझ गई डॉ. वीरेन्द्र कुमार वसु प्रोफेसर श्री रंग शाही के असामयिक अकस्मात् निधन से हिन्दी साहित्य जगत् मर्माहत हो गया है। हिन्दी…
डॉ़. शाही : साहित्य के गाँधी – बलराम भूषण श्रीरंग शाही अब हमारे बीच नहीं हैं। यह जानकर हृदय में जो वेदना उठ रही है, उसका वर्णन इन पंक्तियों से…
डॉ. शाही एक निर्भीक व्यक्तित्व – डॉ. शान्ति कुमारी ” जो नर आत्मदान से अपना जीवन घर भरता है , वही मृत्यु के मुख में भी पड़कर न कभी मरता…
अविभाजित भारत का पहला कृषि अनुसंधानशाला पूसा – वीरेन नंदा बिहार के मुजफ्फरपुर से तीस किलोमीटर दूर पूसा में किलानुमा हवेली हुआ करता था। पूसा अब समस्तीपुर जिला के अंतर्गत…
गेहूं रहा न गुलाब 23 दिसंबर 2024 को बेनीपुर से लौटकर – बिभेष त्रिवेदी इस बार हम लौटने के समय बेनीपुर पहुंचे। मुजफ्फरपुर -सीतामढ़ी रोड में जनाढ़ चौक से पूरब…
ज़िन्दगी जितना सिखा नहीं पाती /हादसे उतना सिखा देते हैं डॉ.भावना समझ में नहीं आ रहा कि कहाँ से शुरू करूँ? मेरी एक ग़ज़ल का शेर है – जिन्दगी जितना…
दिनकर की बाल कविताओं का माधुर्य -डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी हिंदी कविता में दिनकर का समय छायावाद के बाद है. दिनकर पुर हिंदी साहित्य में जयशंकर प्रसाद के बाद दूसरे…
यथार्थ के प्रकाशित धरातल पर हिन्दी ग़ज़ल – अनिरुद्ध सिन्हा…